पूजा ही नहीं, Brain Exercise भी है माला फेरना! साइंस ने माना- दिमाग को री-वायर करता है 'मंत्र जाप'
आज की युवा पीढ़ी भले ही हाथ में रुद्राक्ष या लकड़ी की माला लेकर जाप करने को सिर्फ परलोक सुधारने या अंधविश्वास का जरिया मानती हो, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद चौंकाने वाला है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से लेकर दुनिया भर के बड़े न्यूरोलॉजिस्ट्स अब 'पुनरावृत्ति प्रार्थना' (repetition prayer) और माला के उपयोग पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं। साइंस का साफ कहना है कि जपमाला का प्रयोग हमारे मस्तिष्क (brain) को री-वायर करने का एक अद्भुत टूल है।
आइए जानते हैं कि इसके पीछे का पूरा साइंटिफिक गणित क्या है।
108 का अंक और एकाग्रता का अनूठा गणित
माला में 108 मनके (beads) ही क्यों होते हैं? खगोल विज्ञान (Astronomy) के अनुसार, सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास से 108 गुना है और पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी उसके व्यास की 108 गुना है।
जब हम एक-एक मनका सरकाते हैं, तो हमारा मस्तिष्क एक रिदमिक पैटर्न में आ जाता है। यह लयबद्धता मस्तिष्क की तनाव वाली तरंगों (stress waves) को कम करके शांति वाली तरंगों को एक्टिव कर देती है।
नेचुरल एक्यूप्रेशर: जब हम अंगूठे और उंगली (खासकर अनामिका या मध्यमा) से माला के मनकों को रगड़ते या सरकाते हैं, तो उंगलियों के पोरों पर दबाव पड़ता है।
सेंसरी कॉर्टेक्स कनेक्शन: उंगलियों के सिरों पर स्थित नसों के केंद्र सीधे हमारे मस्तिष्क के सेंसरी कॉर्टेक्स से जुड़े होते हैं। मनकों का यह स्पर्श एक तरह का सूक्ष्म एक्यूप्रेशर है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और घबराहट (anxiety) को कम करने में सीधी मदद करता है।
दोहराव और न्यूरोप्लास्टिसिटी: 'मंकी माइंड' का पक्का इलाज
एक ही मंत्र को बार-बार दोहराना दिमाग के लिए 'सोनिक क्लींजिंग' जैसा काम करता है।
तनाव से मुक्ति: शोध बताते हैं कि जब हम किसी शब्द को लय में दोहराते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का वह हिस्सा शांत हो जाता है जो डर और तनाव पैदा करता है। इसे साइंस की भाषा में न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) कहते हैं। यानी बार-बार के अभ्यास से मस्तिष्क शांत रहने के नए रास्ते खुद बना लेता है।
फिजिकल एंकर: यह ध्यान भटकाने वाले 'मंकी माइंड' को एक बिंदु पर लाने की फोकस ट्रेनिंग है। इंसानी दिमाग को किसी चीज पर टिके रहने के लिए एक फिजिकल एंकर की जरूरत होती है। बिना माला के ध्यान लगाना कठिन होता है क्योंकि मन तुरंत भटक जाता है। माला का स्पर्श हाथ को यह याद दिलाता रहता है कि अभी काम पर ध्यान लगाना है। यह ठीक वैसा ही है जैसे आज के समय में लोग तनाव कम करने के लिए 'स्ट्रेस काउंटर' का उपयोग करते हैं, बस जपमाला इसका हजारों साल पुराना और कहीं अधिक वैज्ञानिक संस्करण है।
क्या कहती है इंटरनेशनल साइंस की रिसर्च?
हार्ट हेल्थ के लिए वरदान: इटली की एक यूनिवर्सिटी की रिसर्च के अनुसार, माला के साथ मंत्र जप करने से श्वसन दर (respiration rate) प्रति मिनट 6 तक आ जाती है, जो हृदय के स्वास्थ्य के लिए सबसे आदर्श (ideal) मानी गई है।
इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक प्रभाव: रुद्राक्ष या तुलसी की माला से निकलने वाले सूक्ष्म इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक प्रभाव एकाग्रता (concentration) बढ़ाने में काफी सहायक पाए गए हैं।
डोपामाइन और अचीवमेंट रिवॉर्ड: लक्ष्य (108 दाने) पूरा करने का अहसास मस्तिष्क में एक 'अचीवमेंट रिवॉर्ड' पैदा करता है, जिससे मन प्रसन्न रहता है।
संपादकीय निष्कर्ष: जपमाला केवल भगवान का नाम जपने का साधन ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन मानसिक व्यायाम (mental exercise) भी है। यह उंगलियों के जरिए मस्तिष्क को शांत करने और याददाश्त को धार देने की एक बेहद सरल फिजियोथेरेपी है।